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बक्सर में संघ का विजयादशमी उत्सव संपन्न, घोष की धुन पर 150 स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन।

विजयादशमी सीमोल्लंघन का उत्सव, संघ के शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन को जीवन में आत्मसात करें स्वयंसेवक : उपेंद्र भाई त्यागीबक्सर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बक्सर नगर के तत्वावधान में मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित भूमिहारी मैदान में विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

मैदान में पंक्तिबद्ध खड़े स्वयंसेवक

विजयादशमी सीमोल्लंघन का उत्सव, संघ के शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन को जीवन में आत्मसात करें स्वयंसेवक : उपेंद्र भाई त्यागीबक्सर।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बक्सर नगर के तत्वावधान में मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित भूमिहारी मैदान में विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लगभग 150 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में घोष की धुन पर नगर में अनुशासित पथ संचलन कर संगठन, एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दक्षिण बिहार प्रांत के प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री उपेंद्र भाई त्यागी जी रहे। अपने बौद्धिक संबोधन में उन्होंने संघ की स्थापना, उसके उद्देश्यों और विजयादशमी उत्सव के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे।

बचपन से ही उनके मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण और देश की स्वतंत्रता की भावना प्रबल थी। उन्होंने समाज को संगठित कर राष्ट्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विजयादशमी के पावन अवसर पर वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी।विजयादशमी सीमोल्लंघन का उत्सव है। यह पर्व हमें अपनी सीमाओं, कमजोरियों और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर बड़े लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। विज्ञान, तकनीक, रक्षा, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में भारत निरंतर प्रगति कर रहा है।

भारत को और अधिक शक्तिशाली एवं समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए समाज का संगठित और जागरूक होना आवश्यक है।संघ के शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन पर दिया विशेष जोरश्री त्यागी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे कर चुका है। संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेने का समय है। उन्होंने स्वयंसेवकों से पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख विषयों को स्वयं के जीवन में आत्मसात कर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के माध्यम से समाज में जाति, वर्ग और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर आपसी प्रेम एवं सद्भाव बढ़ाना होगा। कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवारों में संस्कार, संवाद और भारतीय जीवन मूल्यों को मजबूत करना आवश्यक है। स्वदेशी भाव का जागरण कर स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देना होगा, जिससे देश आत्मनिर्भर बन सके।

इसी प्रकार नागरिक शिष्टाचार के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हुए सार्वजनिक स्वच्छता, यातायात नियमों और सामाजिक अनुशासन का पालन करना चाहिए। वहीं पर्यावरण संरक्षण के लिए जल संरक्षण, पौधारोपण, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा।उन्होंने कहा कि जब स्वयंसेवक इन पांच विषयों को अपने आचरण में उतारेंगे, तभी समाज में व्यापक परिवर्तन संभव होगा।विजयादशमी उत्सव के अवसर पर भूमिहारी मैदान से लगभग 150 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन किया। घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों ने अनुशासन और संगठनात्मक एकता का परिचय दिया।

नगर में निकले पथ संचलन के माध्यम से समाज को संगठित रहने और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।इस अवसर पर दक्षिण बिहार प्रांत के प्रांत कार्यवाह श्री राजेंद्र प्रसाद जी, बक्सर के माननीय नगर संघचालक श्री ओमप्रकाश वर्मा, अभिषेक भारती, अविनाश कुमार, अभिमन्यु सिंह, आलोक देश पांडेय, राजेश राघव, विन्ध्वासिनी मिश्र, अभिजीत ठाकुर, निशांत उपाध्याय, अनिल श्रीवास्तव, राहुल रंजन, सोनू वर्मा, गौरव कुमार, अमरनाथ वर्मा, सहित संघ के विभिन्न दायित्ववान कार्यकर्ता एवं नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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